गरीब चाय वाला Best Moral Story In Hindi

  • by

ये कहानी चाय बेचने वाले एक गरीब इंसान की है, जिसका नाम राजू था | वैसे तो कहने को एक गरीब इंसान था, पर दिल से वो अमीर था, वो अक्सर ही जरुरत मंदो की मदद कर दिया करता था | उसका एक १० का छोटा बेटा था, पैसे ना होने की वजह से वो उसे पढ़ा नहीं सकता था इसलिए उसे भी अपने साथ काम पर ले जाता था | राजू का एक चाय का थैला था, किसी अस्पताल के सामने वो चाय बेचता था | एक दिन एक छोटा बच्चा सामने की मेडिकल दुकान से दवाई लेता है और उसके पैसे दिए बिना, वो दवाई की बोतल चोरी करके भागने लगता है | तो उसके पीछे पीछे दवाई की दुकान का भागने लगता है पकड़कर पीटने लगता था | राजू ये देखकर उस बच्चे को बचाने आता है और उस आदमी से पूछता है – क्या हुआ भाई क्यूँ तुम इस छोटे से बच्चे को पिट रहे हो |वो आदमी जवाब देता है – ये लड़का मेरी दुकान से दवाई चुरा कर भाग रहा था इसलिए मैं इसे पिट रहा हूँ |

राजू ने उस बच्चे की देखा, उस बच्चे की आँखों में आंसू थे | राजू समझ गया था वो अगर चोर होता तो वो दवाई की चोरी नहीं करता, जरूर वो किसी मुसीबत में है | राजू ने दवाई के पैसे उस आदमी को दिए हुए उससे दवाई की बोतल लेकर उस बच्चे के हाथो में दी | वो लड़का दवाई मिलते ही उसे लेकर भागता भागता हॉस्पिटल की और चला गया | राजू फिर से अपनी चाय की दुकान पर चला गया और चाय बेचने लगा | राजू इसी तरह हर किसी की मदद कर दिया करता था | अगर कोई भूखा उसे रोड पर दिखाई देता तो उसे भी कुछ खाने के लिए पैसे दे दिया करता था | ऐसे ही दिन बीतते गए और देखते देखते २५ साल बीत गए | अब राजू बूढ़ा हो चला था, लेकिन फिर भी रोज अपने चाय की दुकान वो खुद ही लगाता था |

एक दिन अपनी दुकान पर काम करते करते चक्कर आ गए और वो बेहोश होकर गिर पड़ा | तभी उसने बेटे ने देखा और तुरंत उसे हॉस्पिटल लेकर गया | एक दिन तक राजू को होश नहीं आया तो डॉक्टर ने उसके बेटे को जल्द ही ऑपरेशन करने के लिए कहा, अगर २ दिनों में ऑपरेशन गया तो उसके पिता कोमा में जा सकते है, इसके लिए ३ लाख रूपए का खर्चा आएगा – यह कहकर डॉक्टर वहां से चला गया | राजू ने अपनी पूरी उम्र में भी इतने पैसे नहीं कमाए थे, उसका बेटा बहुत ही दुखी हो जाता और पैसो का इत्तेजाम कैसे किया जाए ये सोचने लगता है | सोचते सोचते उसकी वही बैठे बैठे आँख और सुबह जाती है |

उठकर वो देखता है उसके पिता को नर्स ले जा रहे थे, वो उनसे पूछता है कि आप लोग मेरे पिता को कहाँ ले जा रहे थे | तभी नर्स उसे जवाब देती है और कहती है – तुम्हारे पिता का ऑपरेशन के लिए ले जा रहे है | फिर राजू का बेटा पूछता है कि हमने तो अभी पैसे भी नहीं भरे तो मेरे पिता का ऑपरेशन कैसे हो सकता है | तब नर्स कहती है – इस हॉस्पिटल के एक डॉक्टर ने तुम्हारे पिता के ऑपरेशन के लिए पैसे दिए, उन्ही के कारण तुम्हारे पिता का ऑपरेशन हो पा रहा है | राजू का ऑपरेशन शुरू होता है, कुछ घंटो के बाद राजू को होश आता है, वो अपने बेटे से मिलता है | उसका बेटा ऑपरेशन के लिए पैसे देने वाले उस डॉक्टर के बारे में राजू को बताता है |

राजू उस डॉक्टर से मिलने जाता है और उसका शुक्रिया करता है |
वो डॉक्टर कहता है – अरे आप मेरा शुक्रिया मत कीजिये ! शुक्रिया तो मुझे आपका करना चाहिए | यह सुनकर राजू चौक जाता है !
डॉक्टर कहता है – शायद आपने मुझे पहचाना नहीं, मैं वही छोटा बच्चा हूँ, जिसे आपने पीटने बचाया था, उसे दिन मेरी माँ की तबियत बहुत ख़राब थी, आपने मुझे दवाई दिला कर मेरी माँ की जान बचायी, उसके लिए आपका शुक्रिया करना चाहिए | इस कहानी में राजू के अच्छे कर्म की वजह से आज उसकी जान बच पायी, उसकी द्वारा लोगो के लिए की गयी सहायता की वजह से आज उसकी किसी ने इतनी बड़ी सहायता की | इसलिए हमे हमेशा अच्छे कर्म करते रहना चाहिए, उसका फल किसी ना किसी रूप में हमे मिल ही जाता है|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *