A Poor Honest Person Moral Story In Hindi For Kids

A Poor Honest Person Moral Story In Hindi For Kids

हनुमान पुर नामक एक गांव में सुनील नाम का एक गरीब इंसान रहता था | वो आस पास के गावों में जाकर पानीपुरी बेचता था, जो भी करता अपनी ईमानदारी से करता | इसलिए गरीब होने के बावजूद भी लोग उसकी इज्जत करते, वो पैसो से भले ही गरीब था पर दिल से बहुत अमीर था | वो अपने परिवार सहित एक छोटे से घर में रहता था, उसकी बीबी और तीन बच्चे थे | बच्चे स्कूल जाते और उसकी बीबी उसके पानीपुरी के धंधे के लिए घर पर पूरियां बना कर उसकी मदद करती | वो हर रोज सबेरे आस पास के गांव में पानीपुरी खिलाने जाता और शाम को वापस लौट कर आता | इतना तो कमा ही लेता था की उसका घर वो आसानी से चला सके | सब कुछ ठीक चल रहा था | वो हर रोज की तरह पानीपुरी बेचकर वापस घर को आ रहा था | आज ग्राहकी बहुत अच्छी थी तो उसे घर वापस लौटने में थोड़ा अधिक समय हो गया | वापस आते समय रस्ते में उसे कुछ लोगो रोक लिया और उसके साथ जबरदस्ती करके उसके दिन भर के जो कमाए हुए पैसे थे वो उन्होंने छीन लिए | वो बेचारा उदास होकर घर लौटा और उसकी बीबी को सारी बात बताई | उसकी बीबी ने कल से उसे जल्दी घर लौट आने को कहा | उस हादसे के बाद से सुनील रोज जल्दी घर लौट आता था |

सब कुछ फिर से ठीक चल रहा था पर फिर किसी दिन अचानक रस्ते में उसकी साइकिल पंचर हो गयी और अंधेरा हो रहा था, आस पास को पंचर की दुकान भी नहीं थी | तो वो साइकिल को हाथ से धकाते हुए घर की और चले आ रहा था | तभी उसे उसके आगे रस्ते पर कुछ का भागते हुए दिखाई दिए, वो वही रूक गया और छिप कर उसने देखा तो उसे वो ही चोर दिखाई दिए उन्होंने कुछ दिन पहले उसे रोककर उसके पैसे छीन लिए थे | पर वो चोर डर के मारे भाग रहे थे और उनमे से एक चोर के हाथ में एक suitcase था, वो चोर भागते भागते गिर गया और suitcase को वही गिरा कर भाग गया | सुनील कुछ समय तक वही छिपकर देखता रहा | उसे फिर रास्ते पर कोई आता जाता हुआ दिखाई नहीं दिया | उसने देखा वो suitcase अभी तक वही पड़ा है | उसने वो suitcase उठाया, जो वजन में कुछ भारी लग रहा था | वो समझ गया था, ये चोर जरूर किसी से घर से ये suitcase चोरी करके भाग रहे थे | अभी अँधेरा बहुत हो गया था, उसने ये suitcase सुबह उस गांव के मुखिया को लौटाने का फैसला किया, ताकि ये जिसका भी suitcase उसे वो वपिस मिल जाए | ये सोचकर वो घर की ओर चल पड़ा | जब घर पंहुचा तो पत्नी ने उसके हाथ में suitcase देखा और अपने पति से पूछा – ये किसका suitcase है ?
सुनील ने सब पूरी बात बताई, उसकी पत्नी ने suitcase खोल कर देता था | उसमे बहुत सारे सोने के आभूषण थे |

उसकी पत्नी ने फिर पूछा अब इसका क्या करोगे ? सुनील ने उत्तर दिया – सुबह होते ही इसे गांव के मुखिया को सौप देने, वो जिसका suitcase है उसे लौटा देंगे | उसकी बीबी ने कहा – आप पागल हो गए हो लक्ष्मी अपने घर खुद चलकर आयी है और आप उसे ठुकराने की बात कर रहे है, नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगी | ये suitcase मैं किसी को नहीं देने दूंगी, इन आभूषणों को बेचकर हम खुद के लिए एक अच्छा सा घर खरीदेंगे और बाकी बचे आभूषणों से हम बेहतर जिंदगी जियेंगे, आपको अब ये पानीपुरी का काम करने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी | सुनील ने पत्नी की बात का विरोध किया पर उसने अपने पति की बात नहीं मानी | पर सुनील ईमानदार था, उसने अपनी पत्नी से कहा – तुम्हे जो करना है वो करो, पर मैं अपना काम बंद नहीं करूँगा, मैं अपनी मेहनत का खाऊंगा, मुझे इन आभूषणों से कोई मतलब नहीं | उसकी बीबी ने उन आभूषणो को बेचकर अपने लिए एक शानदार घर ख़रीदा, पर सुनील ने अपन काम नहीं छोड़ा, वो अब की अपना पानीपुरा का धंधा करता रहा | उन्ही दिनों एक आदमी पंचायत में अपने घर से सोने के आभूषण चोरी होने की शिकायत गांव के मुखिया के पास लेकर आता है | मुखिया इस चोरी की छान बिन करने का विश्वास उस आदमी को दिलाता है | और चोर को ढूढ़ने का फैसला करता है | सुनील की पत्नी ने ज नया घर ख़रीदा उसकी बात पुरे गांव में फ़ैल जाती है | ये बात गांव के मुखिया तक भी पहुँचती है, वो जानता है, सुनील एक पानीपुरी बेचने का धंधा करता है, वो सोच में पड़ जाता है की आखिर वो इतना बड़ा मकान कैसे खरीद सकता है | वो सुनील और उसकी पत्नी को सभा में बुलाता है और उनसे ये पूछता है की उनके पास इतना बड़ा मकान खरीदने के पैसे कहा से आये | सुनील की पत्नी को पता होता है की सुनील झूट नहीं बोलेगा | इसलिए वो ही मुखिया को उत्तर देते हुए कहती है – की उन्होंने अपने पानीपुरी के धंधे से जो पैसे आ रहे थे, उनमे से बचा बचा कर ये घर ख़रीदा है |

सुनील वही मुँह लटकाये चुप चाप खड़ा रहता है | मुखिया सुनील से कहता है – सुनील हमे तुम्हारी ईमानदारी पर बिलकुल भी शक नहीं, पर गांव में आभूषणों की इतनी बड़ी चोरी होना और उसी समय तुम्हारे घर खरीदने की बात ! इन सब को जानने के लिए हमे तुमको बुलाना पड़ा | ये सब हम तुम्हारे मुँह से सुनना चाहते है की तुमने ये मकान कैसे ख़रीदा ?
सुनील एक ईमानदार इंसान था, वो कभी किसी बात के लिए झूट नहीं बोलता था | उसने उस समय भी वैसा ही किया, उसने सारी बात मुखिया को बता दी | मुखिया ने भी सुनील की ईमानदारी के लिए उसे माफ़ कर दिया | और एक बात उससे कही – ये हम सब जानते है की कोई गलत काम नहीं करना चाहिए और हम ऐसा करते भी है की हम कोई गलत काम नहीं करते | मगर काम होते हुए देखना या उसका साथ देना भी एक गलत काम है | मैं जनता हूँ तुमने कोई गलत काम नहीं किया, मगर तुम्हारी बीबी ने गलत काम किया और तुमने उसे वो काम करने दिया, ये एक गलत काम है | चुकी तुम ईमानदार आदमी हो और तुमने अपनी गलती खुद स्वीकार की है इसलिए मैं तुम्हारी पत्नी को माफ़ कर रहा हूँ |

इस कहानी की सिख ये है की ना कोई गलत काम करे, ना ही किसी को करने दे या उसका समर्थन करे |

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