Best Flower Fairy Tales In Hindi For Kids

ये कहानी फूलों की परियों की है, एक घर में अलिसा नाम की एक छोटी लड़की रहती थी जिसकी उम्र १२ साल थी | अलिसा अपने माता पिता की एकलौती संतान थी, इसलिए उसके माता पिता उससे बहुत प्यार करते है अलिसा के पापा बहुत अमीर थे इसलिए वे अलिसा की हर जरुरत को पूरा करते | उसके घर में बहुत ज्यादा नौकर चाकर भी थे जो हर वक्त अलिसा का ख्याल रखते, उसे किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी | अलिसा को सोते वक्त परियों की कहानिया सुनना अच्छा लगता, तभी उसे अच्छे से नींद आती थी | अलिसा बचपन से ही बहुत घमंडी लड़की थी, उसे केवल खुद की तारीफ सुनना ही पसंद था, वो खुद को बहुत खूबसूरत समझती और उसे ये लगता की वो भी एक परी है | उसकी माँ इस बात को लेकर बहुत परेशान थी, उसकी माँ उसे समझती पर उसे खुद की तारीफ के लिए कुछ सुनना पसंद नहीं था |
अलिसा हर देने अपने घर के बाहर बगीचे में घूमने जाती उस सुन्दर फूल बहुत पसंद थे, जिसकी देख भाल एक बुजुर्ग औरत करती | अलिसा उन सुन्दर फूलों को देखकर ये सोचती की आखिर ये इतने सुन्दर कैसे है, तभी एक गरीब लड़की, लगभग उसी की उम्र की वो अलिसा की बगीचे के गेट से उन सुन्दर फूलो को देखने लगी | अलिसा ने उसे गुस्से में पूछा – हेय गरीब लड़की तुम मेरे गेट के बाहर से क्या देख रही हो |
उस लड़की ने जवाब दिया मैं उन सुन्दर फूलो को देख रही हूँ | मेरे भी घर फूल है लेकिन इतने सुन्दर वो कभी नहीं देखते | कितने खूबसूरत है जैसे फूलों की परियों ने इन फूलो पर अपने रंगो को बिखेरा हो |

अलिसा गुस्से से कहती है – ये मेरे फूल है, इन्हे सिर्फ मैं देख सकती हूँ, तुम नहीं | ये केवल मेरे लिए लगाए गए है, जाओ तुम यहाँ से |
अलिसा की बात सुनकर वो लड़की रोते रोते वहां से चली जाती है | और अलिसा फिर से उन फूलों को देखने लगती है, तभी उसे उन फूलो में कुछ परियां नगर आती है जो उन फूलो को अपने अलग अलग रंगो से रंग रही होती है, वो परियां बाहर निकलती है और अलिसा से कहती है | बहुत ही घमंडी लड़की हो तुम, तुमने उस बच्ची को रुलाया है | हम ऐसी जगह पर बिलकुल भी नहीं रह सकती, ये कहकर उनमे से कुछ परियां अलिसा के बगीचे से चली जाती है | उन परियों के वहां से चले जाने से अलिसा बहुत दुखी होती है | जो कुछ परियां वहां होती वो अलिसा से कहती है, दुखी ना हम है ना यहाँ पर, हम तुम्हारे बगीचे के फूलों में रंग भरेंगी | अलिसा खुश हो जाती है, और उनसे दोस्ती करने का कहती है | वो परियां अलिसा से दोस्ती कर लेती है | फिर अलिसा उनसे पूछती हो, तुम ये कैसे कर लेती हो, तुम्हारे पास इतने खूबसूरत रंग कहा से आते है, और तुम ये सब क्यूँ करती हो, तुम्हे इससे क्या मिलता है |

उनमे से एक परी उसका जवाब देती है – ये रंग हमे सूरज की सुनहरी किरणों से मिलते है, जिन्हे हम फूलो पर बिखेरती है | इससे देखने वालों के चेहरे पर ख़ुशी आती है, बस यही हम चाहती है | इस लिए इन रंगो की चमक हम फूलों पर जाकर बिखेरती है | पर तुमने जो उस लड़की के साथ किया इससे हमारी साथी परियों को बहुत दुःख हुआ इसलिए वो यहाँ से चली गयी, तुम्हे उस लड़की के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था |
मुझे इस बात बहुत दुःख है, प्लीज मुझे माफ़ कर दो – अलिसा उन परियों से कहती है | तुम कितनी अच्छी हो, एक जगह से दूसरी जगह हवा में उड़ती रहती हो, तुम्हे बहुत मज़ा आता होगा | तुम मेरी दोस्त बन गयी हो तो क्या तुम अभी जहाँ फूलों में रंग भरने जा रही ही वहां मुझे भी अपने साथ ले जा सकती हो |

वो परियां उसकी बात मान लेती है और उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ ले जाती है, अलिसा को हवा में उड़ना और खूबसूरत जगहों को देखना बहुत अच्छा लगता है | इस तरह वे परियां किसी गरीब बुजुर्ग औरत की झोपड़ी में जाती है, और वहां के फूलो लो अपने रंगो की चमक से रंग देती है | ये देखकर अलिसा उनसे सवाल पूछती है | तुम इतनी खूबसूरत जगहों और बगीचों को छोड़कर यहाँ इस बूढी औरत की झोपड़ी में क्यूँ आयी | मुझे तो लगा तुम किसी बड़े खूबसूरत बगीचे में जाओगी और वहां के फूलो को अपने रंग से रंगो गी |

उनमे से एक परी ने उत्तर दिया – हम उनके बगीचे या घरो में जाती है, जो बहुत दुखी है या जो उदास रहते है | ताकि हम उनको फूलो में अपना रंग बिखेर कर उनके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान ला सके |
ये कहकर वो अगले घर की और जाती है, और वहां के फूलो को रंगने लगती है, अलिसा को वहां पर वही लड़की दिखती है जिसे अलिसा से अपने बगीचे के गेट से भगा दिया था | परियां फूलों में रंग भर के वहां से चली जाती है | और अलिसा को वही पर छोड़ जाती है,
अरे ये क्या ! तुम मुझे छोड़कर कहाँ जा रही हो, मुझे तो अपने घर का रास्ता भी नहीं पता | ये कहकर वो रोने लगती है |
अलिसा ने जिस लड़की को रुलाया था, वो लड़की उसके पास आकर उससे पूछती है – अरे तुम तो वही लड़की हो जिसने सबेरे मुझे अपने गार्डन से भगा दिया था | तुम यहाँ क्या कर रही हो |
अलिसा – मैं रास्ता भटक गयी हूँ, मुझे अपने घर जाने का रास्ता भी नहीं पता है| प्लीज तुम मुझे माफ़ कर दो और मुझे घर छोड़ दो | उस लड़की को अलिसा पर दया आ गयी और वो उसे उसकी घर छोड़ने को निकल पड़ी | वही रास्ते में उन दोनों की दोस्ती हो जाती है | फिर अलिसा उस लड़की को रोजाना अपने बग़ीचे में घूमती है और तरह तरह के फूल दिखती है |

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