Best Story For Kids In Hindi – Short Kids Story 2020

Best Story For Kids In Hindi

एक लम्बे समय पहले हनुमान पुर नाम के गांव में सुरेश और मुकेश नामक आदमी अगल-बगल के घरों में रहते थे | मुकेश की एक सरकारी नौकरी थी, जिसे छोड़कर वो अब घर पर ही रहते थे और मुकेश एक प्राइवेट बिमा एजेंट की नौकरी करते थे |
मुकेश के दो बच्चे थे, लड़की का नाम नित्या और लड़के का राजेश था, वो उनसे बहुत प्यार करता था और उन्ही हर जरुरत को पूरा करता था, बच्चे जो भी मंगाते वो उन्हें लाकर देता |

दूसरी तरफ सुरेश कुछ काम ना होने के कारण दिन भर अपने घर पर ही रहता था, और दुखी बैठा रहता था | मुकेश के घर में सामने उसका एक बगीचा था, जिसमे हर तरह के फूल थे और मुकेश उन्हें पानी दे रहा था और सुरेश उसके घर की खिड़की में से ये सब देख रहा था | एक दिन सुरेश फालतू बैठे बैठे सोचने लगा की करने को मेरे पास कुछ काम तो है नहीं ! तो क्यूँ न मैं अपने घर के सामने खाली जगह में एक बगीचा बनाऊ और उसमे तरह तरह के फूल ऊगा कर, उन्हें बाजार में बेचू इससे मेरी कुछ कमाई भी हो जाएगी |

ये फैसला करके वो पौधे लाकर अपने बगीचे में लगाता है, और उन्हें बेचना शुरू करता है | उसके पास तरह तरह के पौधे होने के कारण सभी उसी के पास आकर उसी से पौधे खरीदते थे | एक दिन मुकेश अपने बगीचे में पानी डाल रहा था, सुरेश भी अपने पौधों में पानी दाल रहा था | सुरेश के अधिक पौधे होने के कारण पानी अधिक लगता, जिससे वो पौधों में उतना ही पानी दे पाटा जितनी पौधों को जरुरत होती | वही मुकेश अपने बगीचे के पौधों में थोड़ा अधिक पानी देता था इस कारण उसके पौधे सुरेश के पौधों से अधिक हरे और चमकदार दिखाई देते थे |

तो मुकेश ने सोचा की मेरे पौधे सुरेश के पौधों से अधिक हरे भरे और चमकदार दिखाई दे रहे है क्यूंकि मैं भी बाजार से कुछ पौधे लाकर अपने बगीचे में लगाऊ, फिर तो आस पास के सभी लोग मुझसे ही पौधे लेंगे और फिर मैं भी खूब पैसे कमाऊंगा | और उसके फैसले के मुताबिक ही अगले दिन के बजाए से तरह-तरह के पौधे लाकर अपने बगीचे में लगा देता है |

Short Kids Story In Hindi 2020

और सुरेश की ही तरह वो भी पौधे बेचने लगता है, उसके अंदाज़ के मुताबिक लोग फिर उससे भी पौधे खरीदने लगे | और इस तरह दोनों का काम बड़े अच्छे से चलता है | कुछ समय बीतता है, एक दिन अचानक ही रात को तेज़ तूफ़ान आता है, जिसमे मुकेश के पौधे ज्यादा पानी देने की वजह से तूफान को सह नहीं पाते और गिर जाते है, वही सुरेश अपने पौधों में सही मात्रा में पानी डालता था जिसकी वजह से उसके पौधे ने मिटटी में अधिक पकड़ बना ली थी, जिससे उसके पौधे तूफान जाने के बाद भी सीधे खड़े थे | मुकेश के बगीचे के सारे पौधे नष्ट होने के कारण वो हतास हो जाता है, उस तूफान के बाद ग्राहक भी मुकेश के पौधे नष्ट हो जाने से सुरेश से ही पौधे खरीदने लगे और फिर से सुरेश का और ज्यादा अच्छे से चलने लगा |

उसके बाद मुकेश ने भी पौधे लगाने बंद कर दिए, सुरेश यह देख रहा था, एक दिन वो मुकेश के पास गया और पूछने लगा | भाई मुकेश मैं बहुत दिनों से देख रहा हूँ, जब से तूफान में तुम्हारे पौधे नष्ट हुए, उसके बाद से तुमने पौधे लगाना ही बंद कर दिया, ऐसा क्यूँ ?
मुकेश ने कहा – हाँ उस रात तूफान के कारण से मेरा काफी नुक्सान हुआ, मेरे सारे के सारे पौधे गिर कर नष्ट हो गए, मगर तुम्हारे पौधे वैसे के वैसे ही है ऐसा कैसे हुआ – मुकेश पूछता है |

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मैं अपने पौधों की जितनी जरुरत होती उतना ही पानी डालता था, इसलिए मेरे पौधे खुद को दृढ बना पाए | और तुम जरुरत से अधिक पानी डालते थे इसलिए तुम्हारे पौधे कभी दृढ नहीं हो पाए और तूफ़ान को वो सह नहीं पाए – सुरेश ने कहा | तुम इस तरह हताश ना हो और एक काम करो तुम बाजार जाकर फिर कुछ नए पौधे लेकर आओ, हम इस बार दोनों मिलकर तुम्हारे पौधों की देख भाल करेंगे और फिर मिलकर दोनों अपने अपने पौधे बेचेंगे |

सुरेश की बात मानकर मुकेश फिर से पौधे लाकर अपने बगीचे में लगता है, फिर मुकेश और सुरेश दोनों मिलकर खुद अच्छे से पौधों की देखभाल करते है, इस तरह एक बार फिर मुकेश का काम फिर से चल पड़ता है और दोनों ही बिना किसी इर्षा भाव या बिना किसी प्रतिस्पर्धा के पौधे बेचते है |

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