सौतेली माँ Best Story In Hindi For Kids

सौतेली माँ Best Story In Hindi For Kids

यही कहानी 8 साल के एक छोटे बच्चे चंदू की है, जिसकी माँ उसके बचपन में ही मर जाती है, अपनी माँ के गुजर चंदू कुछ सहमा सा रहता है, उसे उसकी माँ की बहुत याद आती है | अब उसके घर में उसके अलावा केवल उसके पिता और एक नौकर रहते है | चंदू अब कुछ महीनो से स्कूल जाना भी छोड़ दिया था | उसके पिता उसकी जिम्मेदारी अच्छे से संभाल नहीं पा रहे थे | इसलिए उन्होंने चंदू की देखभाल और उसे माँ का प्यार मिल सके इसलिए दूसरी शादी कर ली | चंदू सौतेली माँ के घर में आने से बिलकुल भी खुश ही था, पर वो किसी से कुछ नहीं कहता और चुपचाप बैठा रहता |

उसने सुन रखा था की सौतेली माँ अच्छी नहीं होती, इसलिए वो उसकी सौतेली माँ को स्वीकार नहीं पा रहा था | पर उसकी नयी माँ बिलकुल उसके विपरीत थी, वो एक बहुत अच्छी औरत थी और उसे बच्चो से भी बहुत प्यार था | वो चंदू के लिए अच्छा अच्छा खाना बनाती, उसका देखभाल करती और उसे रोली सुना कर सुलाती भी | धीरे धीरे चंदू का अपनी सौतेली के प्रति व्यवहार बदलने लगा, वो समझ गया था की वो ऐसी नहीं है |अब उसे माँ की कमी महसूस नहीं हो रही थी और कुछ ही महीनो बाद वो फिर से स्कूल जाने लगा |

एक दिन पड़ोस के घर में रहने वाली औरत घर पर आयी और चंदू की माँ को कहने लगी – और बहन कैसी हो, सब कुछ ठीक चल रहा है ना ! जब से तुम आयी हो सब कुछ संभाल लिया तुमने और सब का कितना ख्याल रखती हो | फिर तुम कब खुशखबरी देने वाली हो ? चंदू के लिए उसे छोटा भाई कब देने वाली हो ?

चंदू की माँ ने उसे औरत को उत्तर देते हुए कहा – उसे बच्चे की कोई जरुरत नहीं है, चंदू मेरा ही तो बच्चा है | वो भी अपनी माँ ही मानता है | उस औरत ने कहा – अरे सौतेला तो सौतेला ही होता है और अपना खून अपना | तुम भले ही उसे सगी औलाद जैसी पालेगी, लेकिन बड़ा होकर वो एक दिन तुम्हे घर से निकाल ही देगा |
चंदू की सौतेली माँ उस औरत को उत्तर देते हुए कहा – वो मुझे माँ कहता है और मैं भी अपना सगा बैठा ही मानती हूँ, मेरा जो फर्ज है वो मैं निभाऊंगी उसके बाद जो हो ऊपर वाले की मर्जी ! ऐसा जवाब सुनते ही वो औरत वहां से चली गयी |

ये चंदू के पापा सुन रहे थे | उन्होंने उसका धन्यवाद करते हुए कहा – मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ, जो तुमने मेरे बेटे को अपना बेटा समझा और उसे माँ का प्यार देने में कोई कमी नहीं रखी, मैं तुम्हारे उस एहसान और त्याग का कर्ज कभी नहीं चूका पाउँगा | सच में उस औरत ने चंदू को अपने बेटे जैसा पाला और उसके कभी माँ की कमी महसूस नहीं होने दी | ऐसे ही कई साल बीत गए चंदू ने अपनी स्कूल और कॉलेज की पढाई पूरी कर ली | चंदू को कॉलेज में किसी लड़की से प्यार करता था, कॉलेज ख़त्म होते ही उसने ये बात अपने माँ और पिता को बताई और उस लड़की से शादी करने की बात कही | चंदू की सौतेली ने बचपन से चंदू की हर इच्छा पूरी और आज भी उसकी माँ ने लड़की को देखे बिना ही चंदू की शादी उससे कराने का फैसला कर लिया |

चंदू के माता पिता अगले ही दिन उस लड़की और देखने और शादी की बात करने लड़की के घर गए, मगर लड़की में माता पिता ने इस शादी से साफ़ इंकार कर दिया | उनका कहना था की जिस घर में सौतेली माँ हो, उस घर में वो अपनी बेटी का रिश्ता नहीं करेंगे | चंदू के पिता ने उन्हें समझाया की चंदू की माँ ने उसे अपने बेटे की तरह पाला है, उसने अपनी ममता में कोई कमी नहीं रखी | यहाँ तक की उसने कभी अपनी संतान को जन्म देने के बारे में भी नहीं सोचा | और आप उस माँ के कारण अपनी बेटी का रिश्ता नहीं करना !

बहुत समझाने के बाद भी वो नहीं माने, चंदू इस बात से बहुत दुखी था, उसने फैसला कर लिया था को वो अगर शादी करेगा तो उसी लड़की से करेगा | उसकी माँ भी उसे लेकर बहुत परेशान रहनी लगी और फिर कुछ दिनों के बाद वो चंदू के पिता के साथ एक बार लड़की के माता पिता से मिलने गयी | वहां जाकर उसने कहा – अगर आप मेरी वजह से अपनी बेटी की शादी मेरे बेटे के साथ नहीं करना चाहते तो मैं खुद शादी के बाद वो घर छोड़ कर चली जाउंगी, फिर आपको और आपकी बेटी को कोई दिक्कत नहीं होगी | लड़की के घर वाले इस बात को मान गए | इधर चंदू के पिता ने उसकी माँ को बहुत समझाया पर चंदू की ख़ुशी के लिए उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला | चंदू को ये बात पता नहीं थी, वो तो इस बात से बहुत खुश था की उसका रिश्ता उस लड़की से साथ जुड़ने जा रहा है, कुछ ही दिनों के बाद दोनों की शादी हो जाती है |

एक दिन अचानक चंदू की माँ सूटकेस लेकर कही जाने लगती है, चंदू उनसे पूछता है की माँ आप कहा जा रही है | माँ कोई जवाब नहीं देती, पास में खड़ी उसकी पत्नी उसे सारी बात बताती | कि इनके घर छोड़ने के बात से ही मेरे माता पिता मेरी शादी आपसे कराने को राजी हुए थे | चंदू उन्हें जाने से रोकता है, पर चंदू के सांस ससुर की दिए गए वचन से बंधी थी, इसलिए उन्हें घर छोड़कर जाना ही होता है, पर उनके साथ चंदू के पिता भी चले जाते है | चंदू इस बात से बहुत उदास रहने लगता है, जिस लड़की से वो शादी करना चाहता था उस लड़की से उसकी शादी भी हो गयी फिर भी उनमे वो ख़ुशी नहीं थी जो शादी के पहले थे | वो हर रोज उसकी सौतेली माँ को ही याद करता रहता, उसकी बीबी को लगा चंदू ये सब कुछ दिनों में भूल जायेगा और वो हमेशा उसका मन अपनी बातों में उलझाए रखती |

एक दिन वो स्टडी रूम में बैठा था, जहाँ बचपन में बैठकर पढाई किया करता था | चंदू पढाई में बहुत अच्छा, उसने स्कूल में कई मैडल भी देते थे | वो उन सब को देखने लगा तो उसकी पत्नी ये पूछा – ये इतने सारे मैडल किसके है | चंदू ने उत्तर दिया – ये सभी मेरे है, स्कूल में पढाई में फर्स्ट आता था इसलिए मुझे ये सब अपने स्कूल से मिले थे | माँ रात भर जागकर मुझे पढ़ाती थी, मेरे लिए दूध गरम करके लाती और मुझे पिलाती थी, मैं पढ़ सकूँ इसलिए वो खुद मेरे लिए मेरे साथ देर रात तक जागती थी और मुझे सुलाने के बाद ही फिर वो सोती थी | ये कहते कहते चंदू की आँखों में से आँसू आ गए, वो उसकी पत्नी से सामने रोने लग गया |

उसकी पत्नी से हाथ जोड़कर कहने लगा – प्लीज माँ को वापस बुला लो , मुझे उनके बिना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता, इसके बदले तुम जो बोलोगी मैं वो करूँगा, पर माँ को वापस घर बुला लो – ये कहकर कहकर रोता रहा | उसकी पत्नी से उसकी ये हालत अब देखी नहीं जा रही थी | उसने तुरंत फ़ोन करके अपने साँस और ससुर को वापस घर बुला लिया | माँ-पापा के घर लौटते ही चंदू अपनी सौतेली माँ के गले लग गया | उसकी पत्नी ये देख रही थी, अब उसे समझ में आ गया था कि वो और उसके माता पिता कितने गलत थे | हर सौतेली माँ एक जैसी नहीं होती, वो उन दोनों की आँखों में एक दूसरे के प्यार देख पा रही थी |

अब सब कुछ अच्छा हो गया था, चंदू की पत्नी का भी उसकी सौतेली माँ के प्रति जो नजरिया था वो बदल गया | फिर दोनों साँस-बहू एक साथ ऐसे रहने लगी जैसे माँ और बेटी हो |

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