Farmer Story In Hindi For Kids – Moral Story In Hindi

एक गांव में राधाराम नाम का एक बुजुर्ग किसान रहता था, उसका एक लड़का था जिसका नाम रघुराम था | राधाराम के पास गांव में कुछ बीघा जमीन थी, जिसमे दोनों बाप बेटे मिलकर कर काम करते और जो फसल निकलती उसमे वो अपना साल भर का गुजरा कर लेते | उनके पास एक बैल था, अधिक पैसे ना होने के कारण वो दूसरा बैल नहीं ला पाते और इसी एक बैल से अपने खेतो की जुताई कर, उस से काम चलाते |

एक दिन वो बैल बीमार पड़ गया, रघुराम और राधाराम को खेतों में फसल लानी थी और उसे बेचने के लिए बाजार भी ले जाना था, तो वे गांव के एक बड़े किसान के पास गए | जिसका नाम किशोरी लाल था, जो अपना छोटे किसानो को भाड़े पर अपना ट्रैक्टर देता था | जितने दिन का काम होता किसान उससे ट्रैक्टर मांग के ले जाते और उसके बदले उसे उसका किराया दे देते | पर किशोरी लाल छोटे किसानों से अपने ट्रैक्टर का कुछ ज्यादा ही किराया वसूल करता था | फिर भी रघुराम और राधाराम दोनों ट्रैक्टर के लिए किशोरी लाल के घर जा पहुंचे |

किशोरी लाल ट्रैक्टर का भाड़ा पुरे दिन के हिसाब से लेता था, उसने रघुराम को अपने ट्रेक्टर का भाड़ा 4000  रूपए बताया | पर रघुराम को तो ट्रेक्टर कुछ ही घंटो के लिए चाहिए था, उसने उस बड़े किसान से निवेदन किया – किशोरी लाल जी हमे तो आपका ट्रेक्टर कुछ ही घंटो के लिए चाहिए था और हम इतने बड़े किसान भी नहीं है की आपको 4000 का भाड़ा दे पाए, तो कृपया आप भाड़ा कम करके बताइये | पुरे गांव में केवल एक ही ट्रेक्टर जो की किशोरी लाल के पास था, तो वो उसका मन चाहा किराया वसूल करता था |

उसने रघुराम से निवेदन को ठुकरा दिया और कहा चाहे ४ घंटे के लिए लेकर जाओ या चाहे १ घंटे के लिए किराया तो उतना ही लगेगा, तुम्हारी मर्जी हो तो ले जाओ वरना रहने दो | वो दोनों बाप बेटे वहां से वापस लौट आये और फिर दोनों अनाज से भरी गाडी खुद ही अपने कंधो पर फुटकर उसे बाजार ले गए | बाजार में अनाज की कमी होने के कारण उन्हें अपनी फसल का अच्छा दाम मिला | जिसे लेकर वो अपने घर आ गए | वही उनके बैल की हालत दिनों दिन ख़राब होती जा रही थी और एक दिन बैल ने अपना दम तोड़ दिया |

पुरानी फसल की कटाई के बाद, फिर से खेत की जुताई कर उन्हें तैयार करना था | तो रघुराम ने सोचा की अब क्या किया जाए | किशोरी लाल से अगर ट्रेक्टर भाड़े पर लिया वह उसका बहुत ज्यादा भाड़ा वसूल करेगा तो अब क्या किया जाए | ऐसे ही सोचते सोचते उसे खयाल आया की जो हाल उसका है यही हाल गांव के दूसरे छोटे किसानो का भी है, वो किसान जिसके पास खुद का ट्रेक्टर नहीं है और जो किशोरी लाल के ट्रेक्टर किराये पर नहीं ला सकते, तो क्यूँ न मैं फसल के कुछ पैसो को जमाकर और कुछ पैसो की क़िस्त बनवाकर मैं एक छोटा यानी मिनी ट्रेक्टर खरीद लू |

जिससे मेरे साथ गांव के अन्य छोटे किसानो का भी काम हो जायेगा | मैं कम दाम पर ट्रेक्टर किराये पर दूंगा, जिससे उसके जो पैसे आएंगे उनसे मैं ट्रेक्टर की बाकी बकाया क़िस्त भर दूंगा | उसके इसके बारे में अपने पिता से कहा और दूसरे दिन ही वो मिनी ट्रेक्टर खरीद लाया | अब उसके खेतो का काम समय पर हो जाता था और गांव के दूसरे छोटे किसान भी उसके किराये पर ट्रेक्टर ले जाके अपनी खेती अच्छे से करते थे |

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