Happiness – Best Moral Story In Hindi

ये कहानी एक ऑफिस के चपरासी रामलाल की है, जो अपनी जिंदगी को बहुत अच्छे से जीता है, उसे हर वक्त खुश रहना बड़े अच्छे आता है, कभी किसी की कही बात का बुरा नहीं मानता, चाहे घर हो या ऑफिस बस मुस्कुराते रहता है | ऑफिस का बॉस उसके इस स्वभाव से बहुत खुश था, क्यूंकि की कोई चाहे कितना भी गुस्सा हो या उसे लुक बुरा कहे, वो हर किसी को हँसकर ही जवाब देता, ऐसा सिर्फ ऑफिस में ही नहीं बल्कि अपने घर पर भी | मगर ऑफिस में काम करने वाला मैनेजर उससे छोटी छोटी बात पर गुस्सा हो जाता था और उसे खरी खोटी सुना देता है, फिर भी वो बेचारा हँसकर उसकी बात सुन लेता था, शायद इसी वजह से ऑफिस के कुछ लोग उसे चिल्लाते ही रहते, उसकी कोई गलती ना होने पर भी उसकी गलती निकालते और अपनी कही और की बडास उस बेचारे रामलाल पर निकालते | वो भी चुप चाप सब सुन लेता और फिर से अपने काम में ऐसे लग जाता जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो | मगर ऑफिस में ऐसे भी कुछ थे, जो रामलाल के इस स्वभाव की सराहना करते, जैसे की हरी !

एक दिन बॉस की सेक्रेटरी रामलाल पर चिल्ला रही थी, हरी ये देख रहा था, वो वहां आकर सेक्रेटरी से पूछता है अरे पूजा मेम क्या हुआ क्यूंकि बेचारे रामलाल पर इतना चिल्ला रही हो, ऐसा क्या हो गया ?
देखो ना हरी में इस गेट से अंदर आ रही थी तभी मेरी साड़ी इस गेट में निकली कील में उलझकर फट गयी – सेक्रेटरी हरी से कहती है |
तो इसमें इस इस बेचारे का दोष है, आप इसे क्यूँ चीला रही है |
ये रामलाल को पता था की फिर भी इसने मुझे नहीं बताया की दरवाजे की कील बाहर निकली हुई है, अगर ये कह देता तो मेरी साडी नहीं फटती |

पर फिर बह इसमें तो इसका कोई दोष नहीं, आपका अपनी साड़ी का पल्लू संभाल कर चलना था, अगर आपके ध्यान से चलने की वजह से ये साड़ी फटी है तो इसमें इसका कोई कसूर नहीं – हरी से कहता है !
नाराज रामलाल पर अपना सारा गुस्सा निकालकर वहां से चले जाती है, रामलाल की को गलती ना होने पर रामलाल सब सुन लेता फिर भी वो मुस्कुराता रहता है |

हरी फिर रामलाल से पूछता है – हर कोई आपका इतना कुछ सुना देता, हर कोई अपना गुस्सा आप पर निकाल कर चेले जाता है, फिर भी आप कभी उदास नहीं होते और हमेशा मुस्कुराते रहते है, ये सब आप कैसे करते है |
अगर हमे कोई थोड़ा कुछ कह दे तो हम दिन भर उस बात को लेकर बैठ जाते और दिनभर उदास रहते है | पर आप कभी किसी की बात का बुरा नहीं मानते, ऐसा कैसे ?
रामलाल उत्तर देता है और कहता है – दूसरे मेरे साथ कैसा बर्ताव करते है, ये मेरे हाथ में नहीं है, पर मुझे कैसा बर्ताव करना चाहिए ये मेरे हाथ में है, सुख और दुःख जीवन में आते जाते रहते है, हम दुःख के समय में या तो दुखी होकर खुद का खून जलाये या तो मुस्कुरा कर अपने हर गम को अलविदा कर दो | अगर दुखी होकर हम दुःख को गले लगा लेते है तो ये हमे और दुखी कर देता है इसलिए उस दुःख के पल को भूलकर ख़ुशी के साथ आने वाले पल का स्वागत करना चाहिए |
हरी भी अपने जीवन में कई बार किसी की कही बात को या किसी अपने से मिले दुःख के कारण अक्सर उदास हो जाता था | मगर अब उसके साथ ऐसा नहीं होता, क्यूंकि अब उसे जिंदगी जीना आ गया था, वो जिंदगी की ख़ुशी से जीना सिख गया था और वो भी किसकी वजह से | उसके ऑफिस में काम करने वाले एक छोटे से चपरासी की वजह से |

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