Naukar Ki Beti – Best Story For Kids In Hindi

Naukar Ki Beti (नौकर की बेटी) – Best Moral Story For Kids In Hindi

एक छोटे से शहर में एक व्यापारी रहता था, उसकी एक बीबी और एक बच्ची थी | व्यापारी जितना सीधा और सज्जन था, उसकी बीबी उसके विपरीत थी | व्यापारी के पास इतना पैसा होने के बाद भी उसमे जरा भी घमंड नहीं था, पर उसकी बीबी बहुत ही घमंडी थी | उसके घर में कई काम करने वाले नौकर थे, पर वो छोटी छोटी बात पर हर किसी को कुछ ना कुछ सुना देती | इसलिए ज्यादा दिनों तक उसके घर कोई नौकर टिक नहीं पता था | कल ही उसके घर काम करने वाली नौकरानी ने काम छोड़ दिया था, कपडे और बर्तन के लिए उसे फिर कोई नौकर चाहिए था | तो वो अपने पति से घर के काम के लिए नौकर देखने को कहती है, आज घर में चाय बनाने वाला भी कोई नहीं था, तो सेठ ने सामने चंदू चाय वाले के दुकान से चाय बुलाई | चंदू चाय देने सेठ के घर आया, तभी सेठ ने चंदू से घर का काम कर सके ऐसे किसी नौकर की तलाश के बारे में कहा | चंदू के पास आज ही औरत काम के लिए आयी थी, जिनके पति का देहांत हो गया था और अपनी बच्ची के पेट पालने के लिए इधर उधर भटक भटक कर काम ढूंढ रही थी |

उसने उस औरत के बारे में सेठ को बताया, सेठ बहुत दयालु था उसने उस औरत को काम पर रख लिया | उस औरत की एक बच्ची थी जिसका नाम तमन्ना था | सेठानी ने उस औरत को घर का सारा काम समझा दिया और उसकी बेटी को रूचि से दूर रखने को कहा, ताकि वो अपने गंदे हाथ उसकी बेटी को छू भी ना सके | सेठानी बहुत घमंडी थी, वो रोज किसी न किसी नौकर पर अपना गुस्सा निकालती, कुछ तो काम छोड़कर चले भी गए | एक दिन तमन्ना बगीचे में खेल रही थी, ऊपर बालकनी में कुछ कपडे सुख रहे थे, उनमे से रूखी का फ्रॉक हवा चलने के कारण नीचे गिर गया | तमन्ना फ्रॉक उठाकर घर के अंदर ले गयी, सेठानी ने तमन्ना के हाथ में रूखी का फ्रॉक देख लिया | वो बिना का बात सुनी उस बेचारी बच्ची पर चिल्लाने लगी, तभी उसकी माँ ने आकर सेठानी से माफ़ी मांगी, और आगे से ऐसा नहीं होगा कहकर उसके सामने हाथ जोड़ने लगी, सेठानी वो फ्रॉक तमन्ना के मुँह पर फेक कर चली गयी | एक दिन घर पर कोई नहीं था, तमन्ना और रूखी केवल घर में अकेली थी | सेठानी तमन्ना की माँ को साथ लेकर बाजार से कुछ सामान खरीदने चली गयी और तमन्ना को उसकी बेटी से दूर रहने को कहा |

रूचि हाल में अपने खिलौनों के साथ खेल रही थी, तभी खेलते-खेलते वो अचानक जमीन पर गिर पड़ी | तमन्ना डर गयी और दौड़ कर उसके पास पहुँची, उसने पानी का गिलास उठाया और पानी के छींटे रूचि के मुँह पर मारे | पर फिर भी वो नहीं उठी, घर में कोई नहीं जिसे वो बुला सके, तमन्ना जल्दी से दौड़कर घर के बाहर गयी और बाहर जाकर किसी पडोसी को बुलाकर लायी | उस पडोसी ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया | इतनी ही देर में सेठ और सेठानी भी जल्दी से घर आये और डॉक्टर से अपनी बेटी की हालत पूछने लगे | डॉक्टर ने कहा – रूचि अभी बिलकुल ठीक है, ग्लूकोज की कमी के कारण से वो चक्कर खाकर गिर पड़ी, वो तो अच्छा हुआ मुझे समय पर बुला लिया गया, वरना कुछ भी हो सकता था | सेठ और सेठानी उस पडोसी का धन्यवाद करने लगे | तभी उसने कहा – धन्यवाद मुझे नहीं इस छोटी सी बच्ची का कीजिये, जो मुझे बुलाकर लायी और मुझे आपकी बच्ची के हालत के बारे में बताया | सेठानी को तमन्ना के साथ किये दुर्व्यवहार के कारण पछतावा हो रहा था | उसने तमन्ना और उसकी माँ से माफ़ी मांगी | उस दिन के बाद रूचि और तमन्ना दोनों बहुत अच्छी दोस्त बन दोनों साथ में ही खेलने लगी | अब सेठानी का भी घमंड टूट चूका था और उसे तमन्ना से भी कोई शिकायत नहीं थी |

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