Power of Unity (एकता की शक्ति) – Best Moral Story For Kids

ये कहानी एक स्टूडेंट की है, जिसका नाम राजेश है, जो अपनी ८ वीं की परीक्षा पास कर नए स्कूल में दाखिला लेता है | आज राजेश का अपनी नयी स्कूल में पहला दिन होता है, वो जल्दी से तैयार होकर अपनी स्कूल बस का इंतजार करता है, स्कूल बस आती है और वो उसमे चढ़ जाता है | बस में आगे की सीट देखकर वो उस पर बैठ जाता है, तभी पीछे एक आवाज़ आती है, इस सीट पर मत बैठो !

राजेश पीछे मुड़कर देखता है उसे सतीश नाम का एक लड़का पीछे की सीट पर बैठा हुआ दिखाई पड़ता है, सतीश राजेश को उस सीट पर से उठकर पीछे की सीट पर आने को कहता है | राजेश वहां से पीछे जाकर सतीश के पास जाकर बैठ जाता है और सतीश से कहता है – हाय मेरा नाम राजेश है, तुम्हारा नाम ?
सतीश – मेरा नाम सतीश है |
राजेश – तुमने मुझे आगे की सीट से उठ जाने को क्यूँ कहा ?
सतीश – तुम नए हो ना शायद इसलिए तुम्हे पता नहीं, वो सीट मुकेश की है, आज वही उस सीट पर बैठता है | तुम अभी उसे जानते नहीं वो बहुत खतरनाक है |

थोड़ी देर में अगले स्टॉप से मुकेश बस में चढ़ता है और अपनी आगे की सीट पर जाकर बैठता है | वो उसके पास में बैठे लड़के से कहता है – चल यहाँ से उठ, कही और जाकर बैठ मुझे यहाँ पर अपना बेग रखना है |
वो लड़का डर में काँपते हुए कहता है, मुकेश भय्या पीछे कोई भी सीट खाली नहीं है, मैं कहा जाकर बैठूंगा | मुकेश चिल्ला कर उस लड़के को उठा देता, वो लड़का पुरे रस्ते खड़े खड़े स्कूल जाता है | राजेश ये सब देख रहा होता है, वो सतीश से पूछता है, अगर मुकेश सबको इतना परेशान करता है तो कोई इसकी शिकायत प्रिंसिपल को क्यूँ नहीं करता | सतीश उत्तर देता है और कहता है – सब इससे डरते है, एक बार एक लड़के ने इसकी शिकायत कर दी थी, दूसरे दिन इसने उसे इतना परेशान किया की वो स्कूल छोड़कर ही भाग गया |

राजेश स्कूल से घर लौटता है, वो खाना खाने वक्त भी मुकेश के ही बारे में सोच रहा होता | राजेश की मम्मी उससे पूछती है क्या हुआ बेटा क्या सोच रहे हो ? राजेश अपनी मम्मी को अपनी बेस्ट फ्रेंड मानता है इसलिए वो स्कूल बस की सारी बात अपनी मम्मी को बताता है | उसकी मम्मी उसे एक कहानी सुनती है, जिसका नाम होता है एकता की शक्ति ! वो ये कहानी सुनकर समझ जाता है उसे क्या करना है |

अगले दिन वो स्कूल बस में चढ़ता है और बस के सारे लड़को को वो समझाता है की अगर हम एक साथ हो जाए तो मुकेश हमारा कुछ नहीं कर सकता | बस के सारे लड़को को ये बात समझ में आ जाती है | अगले स्टॉप से मुकेश बस में चढ़ता है, मगर उसकी सीट पर आज राजेश बैठ होता | मुकेश राजेश को कहता है – तुझे पता नहीं ये मेरी सीट है, तेरी इतनी हिम्मत, रूक तुझे अभी बताता हूँ |

बस के सारे लड़के अपनी सीट से खड़े हो जाते है और राजेश के सामने जाकर खड़े हो जाते है | मुकेश सभी को एक साथ देख डर जाता है है और पीछे की सीट पे चुपचाप जाकर बैठ जाता है | स्कूल बस के सारे बच्चे अपनी जीत से बहुत खुश होते है और उस दिन के बाद मुकेश किसी को परेशान नहीं करता और चुपचाप जहाँ जगह मिल जाती वहां बैठ जाता | इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की एकता में बहुत शक्ति होती है | अगर किसी मुसीबत का सामना करना हो तो हमे एक जुट होकर करना चाहिए !

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