Time Importance Story In Hindi For Kids and Students

Time Importance Story In Hindi For Kids and Students

रिंकी और रोहन दो भाई बहन थे, रिंकी रोहन से 1 साल बड़ी थी | रोहन की उम्र 8 साल और रिंकी की उम्र 9 साल थी | दोनों एक साथ एक ही में पढ़ने जाते थे, रिंकी पढाई में रोहन से काफी अच्छी थी और वो समय का भी ख्याल रहने वाली लड़की थी, वो अपना काम सही समय पर निपटा लेती थी फिर चाहे वो स्कूल का होम वर्क हो या घर का कोई काम | जब की रोहन असली खोर था वो हर काम को बस टालता रहता था | रिंकी घर में सबकी चाहती थी और उसके मम्मी पापा को उस पर गर्व था | जब रोहन स्कूल का दिया हुआ होम वर्क नहीं करता था तो उसके मम्मी पापा कई बार रोहन को रिंकी का ही उदहारण देकर उसे समझाते थे – बेटा अपनी दीदी को देखो वो समय पर अपना काम कर लेती तुम भी उसकी की तरह बनो | समय पर अपना काम कर लेना चाहिए, अगर समय निकल जाए तो बाद में पश्चाताना हमे ही को पड़ता है | ऐसा उसे समझाते थे, पर रोहन किसी की एक ना सुनता |

और कुछ ना कुछ बहाने बना कर खेलने चला जाता | रोहन और रिंकी की परीक्षा नज़दीक आ रही थी | रिंकी ने अपने परीक्षा की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी थी, अब परीक्षा का केवल एक महीना बचा था | रिंकी देर रात तक पढाई करती और वो अपने भाई रोहन को भी साथ में पड़ने को कहती | मगर रोहन बहाने मार के कुछ समय तक कार्टून देखता और फिर सो जाता | परीक्षा धीरे धीरे और नज़दीक आती गयी | एक दिन उनके पापा ने रिंकी और रोहन से उनकी परीक्षा के बारे में पूछा – बेटा तुम दोनों की परीक्षाएं कब से शुरू हो रही है | रिंकी के जवाब दिया – पापा अगले हफ्ते से ही शुरू हो रही है, अगले सोमवार हमारा पहला पेपर है |
पापा ने फिर पूछा – तुम्हारी पढाई कैसी चल रही है, रिंकी के जवाब दिया – पापा बहुत अच्छे से चल रही है, मैंने अपनी सारी पढाई पूरी कर ली अब बस एक बार Revision करना है |

पापा ने फिर रोहन से पूछा – रोहन तुम्हारी पढाई कैसी चल रही है, तुम पढाई कर रहे हो या नहीं ? पढ़ लूंगा पापा परीक्षा को अभी पूरा एक हफ्ता बाकी है, मैं दो दिन में ही अपनी पढाई पूरी कर लूंगा | यह कहकर रोहन अपने दोस्तों में खेलने चला जाता है | रिंकी और उसके पिता को रोहन की फ़िक्र होने लगती है |

धीरे धीरे पूरा हफ्ता बीतता चला गया दो दिन परीक्षा थी | रोहन ने अब भी अपनी पढाई शुरू नहीं की थी, उसे लगता था अभी तो समय है मैं बड़ी आसानी से पढ़ लूंगा और खेलने में ही उसका ध्यान लगा रहता | उनका छोटा गांव था, बारिश का मौसम हो रहा था | उनके गांव में बारिश के समय में तेज़ बरसात होने से अक्सर ही बिजली चले जाया करती थी |

आज बारिश का मौसम हो रहा था कर कल उनका पहला पेपर था | रोहन आज भी खेलने जा रहा था तो रिंकी ने उसे खेलने जाने से रोका और कहा – रोहन कल तुम्हारा पेपर है, तुमने अभी तक जरा भी पढाई नहीं की है और ऊपर से बारिश का मौसम हो रहा है, हो सके तो आज रात को बिजली भी नहीं रहेगी |
दीदी में पढ़ लूंगा अभी तो पूरा दिन बाकी है और वैसे भी अभी तो दोपहर बाकी है, शाम बाकी है, कभी भी पढ़ लूंगा | और तुम घबराओ मत बिजली भी नहीं जाएगी | यह कहकर रोहन फिर खेलने के लिए चला जाता है |

खेलते खेलते दोपहर से शाम हो जाते है, रिंकी को रोहन की बहुत फ़िक्र होने लगती है, शाम को रोहन घर लौटता है, तभी अचानक से तेज़ बारिश शरू हो जाती है और वो पढ़ने ही बैठता है और बिजली चले जाती है | फिर रोहन जोर जोर से रोने लगता है | रिंकी उससे पूछती है की क्यूँ रो रहे हो तुम |
रोहन जवाब देता है, कल मेरा पेपर है मैंने बिलकुल भी पढाई नहीं की, मैंने सोचा रात को पढ़ लूंगा, लेकिन पढ़ने बैठा कर लाइट चले गयी |
मैंने तो तुम्हे पहले ही समझाया था पर तुमने मेरी सुनी ही नहीं | अब रोने से क्या फायदा?

रोहन को अपनी गलती का पश्तावा होता है और वह अपनी दीदी से माफ़ी मांगता हुआ कहता है, काश तुम्हारी बात मानकर मैंने पहले ही पढाई कर ली होती | अब मेर क्या होगा, मैं तू इस पेपर में फ़ैल हो जाऊंगा और जोर जोर से रोने लगता है |

अपने चोट भाई की हालत रिंकी से देखि नहीं जा रही थी | रिंकी, रोहन से एक क्लास आगे थी, उसने अपने कल के पेपर की तैयारी भी पूरी कर ली थी और उसका Revision भी पूरा कर लिया था | तो रिंकी ने खुद रोहन को पढ़ने का फैसला किया | लेकिन बिजली तो थी नहीं तो कैंडल की लाइट में रिंकी ने रोहन को खास खास टॉपिक को रात भर में पूरा पढ़ाया | और सबेरे होते ही दोनों एक साथ पेपर देने गए | रोहन के पेपर में जो जो भी पूछा गया था वो सब रिंकी ने रोहन को पढ़ा दिया था | इस वजह से उसका पेपर बहुत ही अच्छा गया था |

घर आकर उसने रिंकी को धन्यवाद कहा और वादा किया की आगे से हर काम वो समय पर पूरा करेगा और जो घर के बड़े कहेंगे उनकी बात भी वो अवश्य मानेगा |

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